राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हाशिए पर पड़े समुदायों का सशक्तिकरण
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Abstract
यह शोध-पत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व और हाशिए पर पड़े समुदायों—जैसे दलित, आदिवासी, महिलाएँ तथा अन्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समूहों—के सशक्तिकरण की प्रक्रिया का विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं तथा इन पहलों का उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है।
पुनर्विचार से पता चलता है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व मात्र सत्ता में भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में समान अवसर, अधिकारों की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और आवाज़ उठाने की क्षमता से भी गहराई से जुड़ा है। शोध में आरक्षण नीतियों, विधिक प्रावधानों, सरकारी योजनाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका का भी अध्ययन किया गया है, जो इन समुदायों के सशक्तिकरण में सहायक रहे हैं।